Happy Shree Krishna Janmashtmi2019

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Happy Shree Krishna Janmashtmi

भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं में निपुण थे और इसीलिए इन्हें लीलाधर भी कहा जाता है। इनका सम्पूर्ण जीवन ही सीखों से भरा हुआ है।

कृष्ण भगवन की कुछ कुछ बातें जो आज के इस योग में बहुत कुछ सिखाती हैं.

1. श्रीकृष्ण ने अपने सम्पूर्ण जीवन में लीलाएं की। उन्होंने अपने तरकीब से मार्ग प्रशस्त किए और बने-बनाए लीक से हटकर सोचा और किया। उन्होंने कभी अपनी भूमिका को लेकर डटे नहीं रहे। उन्हें जब जो अवसर मिला उसको किया। राजा होते हुए भी श्रीकृष्ण ने सारथी का कार्य तक किया।

2. भगवान कृष्ण ने सत्य का साथ दिया और बुरे से बुरा वक्त में भी पांडवों के साथ खड़े रहे। दोस्त वही सच्चे होते हैं जो किसी भी परिस्थिति में आपका साथ निभाते हैं। ऐसे दोस्तों को आप अपने से जोड़कर रखें जो अनुकूल स्थिति में आपका साथ देंगे तो वहीं मुश्किल घड़ी में भी सही मार्ग दिखाए।

3. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को न केवल दिव्य ज्ञान दिए अपितु टूटने पर संभाला तो वहीं युद्ध नीति से लेकर सभी विद्याओं से परिचित कराया। सारथी की भूमिका में रहते हुए भी उन्होंने अपने ज्ञान और क्षमता को दबा कर नहीं रखा।

4. श्रीकृष्ण ने गीताज्ञान देते हुए कहा था ‘क्यों व्यर्थ चिंता करते हो? किससे व्यर्थ में डरते हो?

5.भगवान कहते हैं कि मनुष्य को भय से दूर रहना चाहिए। बेवजह हार के भय से अकर्मण्य बनने से अच्छा है, लक्ष्य की ओर बढ़ें। सफलता आपके क़दमों में होगी।कर्म का फल सदैव ही मीठा होता है। भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान में कर्म पर ध्यान देना चाहिए।

6.भगवान श्रीकृष्ण ने मित्रता के निर्वाह की भी शिक्षा दी है। मित्रता के रास्ते में ओहदा नहीं आता है। दोस्ती मुक्त हृदय से निभाई जाती है।

7.इतना ही नहीं, श्रीकृष्ण ने ये भी सिखाया है कि जब सीधे रास्‍ते मंजिल मुश्किल लगे तो कूटनीति का इस्तेमाल भी करना चाहिए।

कृष्ण का संपूर्ण जीवन किसी सबक से कम नहीं रहा है। उन्होंने अपने जीवन काल में सभी रिश्तों को बेहद ही सरलता और सहजता के साथ निभाया है। फिर चाहे वह पांडवों से दोस्ती हो या फिर गोपियों से प्यार। कृष्ण के असली माता-पिता यशोदा और नंद थे, लेकिन उनका पालन-पोषण वासुदेव और देवकी ने किया था। कृष्ण ने अपनी दोनों माताओं का स्थान अपने जीवन में एक सामान रखा। सभी को एक समान आदर और सम्मान कैसे दिया जाता है, यह भगवान कृष्ण से सीखा जा सकता है। कृष्ण की लीला को देखने के बाद हमें भले ही लगे कि भगवान कृष्ण हमेशा अपने दोस्तों और कार्य में व्यस्त रहते थे, लेकिन इन सभी के साथ वह अपने गुरुओं का सम्मान करना कभी नहीं भूलते थे। श्रीकृष्ण हमेशा अपने गुरुओं के प्रति आदर भाव रखते थे। कृष्ण के चाहने वालों की कमी नहीं थी, लेकिन वृदांवन में राधा के लिए उनका प्रेम सच्चा था। जबकि राधा के साथ ही तमाम गोपियां भी भगवान कृष्ण को बहुत प्यार करती थीं। आज के दौर में लोगों को कृष्ण से प्यार और सम्मान का अमूल्य गुण अवश्य सीखना चाहिए। 

 

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