Aja Ekadashi 2019, Puja Vidhi Importance Vrat Katha

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अजा एकादशी का महत्व एवं व्रत विधि

अजा एकादशी का व्रत रखने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर धन संपत्ति से भर जाता है। इस दिन उपवास रखकर पूरे विधि विधान से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

व्रत की विधि

अजा एकादशी का व्रत रखने के लिए मन एवं शरीर को शुद्ध रखें।
प्रातःकाल उठकर पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल से पवित्र करें।
अपने शरीर पर तिल या मिट्टी का लेप लगाएं और स्वच्छ जल से स्नान करके नए वस्त्र धारण करें।
इसके बाद भगवान विष्णु को घी का दीया, धूप एवं फल सहित अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
अंत में पूरी श्रद्धा से भगवान की आराधना करें। आपको जरूर फल प्राप्त होगा।

पूजा विधि

अपने घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रतिमा के सामने कलश में चावल भरकर रखें और कलश के ऊपर स्वास्तिक बनाएं और कलश को लाल वस्त्र या चुनरी से सजाएं।
विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करने के बाद उनकी प्रतिमा को कुंभ के ऊपर स्थापित करें और व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद भगवान को लाल और पीले फूल अर्पित करें और भोग लगाएं।
अगले दिन सुबह स्नान करके भगवान की पूजा करें और सूर्य को जचल ढ़ाकर उपवास के सफलता की कामना करें।

व्रत कथा
राजा हरिश्चंद्र अपनी ईमानदारी के लिए बहुत प्रसिद्ध थे। उनकी ईमानदारी की परीक्षा देने के लिए एक बार देवताओं ने उन्हें ऋषि विश्वामित्र का अपना सारा राज पाट दान करने के लिए कहा। तब राजा के पास जो कुछ भी था उन्होंने सबकुछ विश्वामित्र को दान कर दिया। अंत में जब ऋषि ने राजा हरिश्चंद्र से पांच सौ स्वर्ण मुद्राएं दान में मांगी तो उनके पास अब दान करने के लिए कुछ नहीं बचा था, इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी और पुत्र को दान कर दिया और स्वंय एक चांडाल के दास बन गए।

एक दिन राजा हरिश्चंद्र अजा एकादशी का व्रत रखकर श्मशान घाट पर पहरा दे रहे थे तभी उनकी पत्नी अपने मृत बेटे रोहिताश्व को लेकर श्मशान घाट पहुंची। तब हरिश्चंद्र ने बेटे का अंतिम संस्कार करने के लिए रानी से शुल्क मांगा। कुछ ना होने पर रानी ने अपनी आधी साड़ी फाड़कर उन्हें दे दी। देवता हरिश्चंद्र की ईमानदारी पर प्रसन्न हुए और उन्होंने उनके पुत्र को जीवित कर दिया और राजा हरिश्चंद्र का सारा साम्राज्य भी वापस लौटा दिया।

 

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