Rani Lakshmi Bai Jayanti

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‘खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी’

रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) का जन्म 19 नवम्बर 1828 को बनारस में हुआ था. रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) की आज जयंती हैं. ‘खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी’ ये कविता आज भी रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा बयां करती है. एक समय था जब एक-एक कर कई राजाओं ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेक दिए थे लेकिन झांसी की रानी (Queen of Jhansi) लक्ष्मीबाई ने अपने साहस के दम पर अंग्रेजों को धूल चटाई थी. उन्होंने सिर्फ़ 29 साल की उम्र में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से जद्दोजहद की और रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुईं. रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) ने झांसी की रक्षा के लिए सेना में महिलाओं की भर्ती की थी. लक्ष्मी बाई ने महिलाओं को युद्ध का प्रशिक्षण दिया था. साधारण जनता ने भी अंग्रेजों से झांसी को बचाने के लिए हुए इस संग्राम में सहयोग दिया था.

1. रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को बनारस में हुआ था. उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था और इन्हें प्यार से मनु और छबीली भी बुलाया जाता था. इनका जन्म 19 नवम्बर 1828 को हुआ.

2. मराठा ब्राह्मण से आने वाली मणिकर्णिका बचपन से ही शास्त्रों और शस्त ज्ञान की धनी थीं. इनके पिता मोरोपंत मराठा बाजीराव (द्वितीय) की सेवा करते थे और मां भागीरथीबाई बहुत बुद्धीमान और संस्कृत को जानने वाली थी. लेकिन मणिकर्णिका के जन्म के बाद 4 साल ही उन्हें मां का प्यार नहीं मिल पाया, 1832 में उनकी मृत्यु हो गई.

3. 1842 में 14 साल की उम्र में मणिकर्णिका का विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव नेवालकर से हुआ. राजा गंगाधर राव झांसी के एक योग्य मराठा राजा थे. उनके कार्यकाल से पहले झांसी अंग्रेज़ों के कर्ज तले दबी हुई थी. लेकिन सत्ता में आने के बाद कुछ ही सालों में उन्होंने अंग्रेज़ों को बाहर कर दिया. इस वक्त में रानी मणिकर्णिका उनके साथ थी.

4. रानी लक्ष्मीबाई और राजा गंगाधर ने बेटे को जन्म दिया था जो कि सिर्फ 4 महीने ही जीवित रह सका. राजा गंगाधर ने अपने चचेरे भाई का बच्चा गोद लिया और उसे दामोदार राव नाम दिया गया.

5.  राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद रानी लक्ष्मीबाई कमज़ोर पड़ने लगीं और इस बात का फायदा अंग्रेज़ी सरकार और पड़ोसी राज्यों ने उठाया. इन सभी ने मिलकर झांसी पर आक्रमण शुरू कर दिया.  1857 तक झांसी दुश्मनों से घिर चुकी थी और फिर झांसी को दुश्मनों से बचाने का जिम्मा खुद रानी लक्ष्मीबाई ने अपने हाथों में लिया. उन्होंने अपनी महिला सेना तैयार की और इसका नाम दिया ‘दुर्गा दल’. इस दुर्गा दल का प्रमुख उन्होंने अपनी हमशक्ल झलकारी बाई को बनाया.

6. 1858 में युद्ध के दौरान अंग्रेज़ी सेना ने पूरी झांसी को घेर लिया और पूरे राज्य पर कब्ज़ा कर लिया. लेकिन रानी लक्ष्मीबाई भागने में सफल रहीं. वहां से निकलर को तात्या टोपे से मिलीं.

7.  रानी लक्ष्मीबाई ने तात्या टोपे के साथ मिलकर ग्वालियर के एक किले पर कब्ज़ा किया. लेकिन 18 जून 1858 को अंग्रेज़ों से लड़ते हुए 23 साल की उम्र में रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु हो गई.

 

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